गींठ मे उलझी है

मत सुलझाओ उसे

रूठी सी है थोड़ी

जन फुसलाओ उसे

ख़ामियों से जिंदा जो कहानियां है

मुकम्मल कर ना दफ़नाओ उसे।

अधूरे ख़्वाबो की सौंधी महक

एकतरफ़ा इश़्क का गुनगुना दर्द

मसनद का वो काफिर नशा

भूख की वो बेशरम शर्त

बेअदब सी खूबसूरत है

कायदे ना सिखाओ उसे

ख़ामियों से जिंदा जो कहानियां है

मुकम्मल कर ना दफ़नाओ उसे।

मुकम्मल कर ना दफ़नाओ उसे।