साथ को साथ का साथ रहने दो

मुस्कुराती हुई अपनी हर बात रहने दो 

किस बात की रंजिशें,कौन सी खलिश 

अन्तर्मन को छूते वो जज़्बात रहने दो!


आओ,बैठो,पानी में चाँद उतरने दो 

ठहरो,वो आसमान पिघलने दो

वो आख़िरी सितारा ग़ुम ना हो जाए 

तब तलक

मेरी साँसों में अपने ख्यालात रहने दो !

डाॅ श्वेता