आज दूर हो,

कभी तो पास आओगी

किस्मत पलटेगी जिस दिन

तुम भी मुस्कुराओगी



यह मन अकेला भटकता है

यह रूह हमेशा तड़पती है

चीर देती है दिल को मेरे

जब आग वहां भड़कती है


इस आग में हमें जलाकर और कितना इतराओगी

आज दूर हो,

कभी तो पास आओगी



अंधेरा कुरेदे ज़ख़्मों को

रोशनी भी चिढ़ाती है

हवाएं नींद उड़ा कर गुज़रे

बारिश भी छेड़ जाती है


हमारी प्यार की पूजा में तुम भी सर झुकाओगी

आज दूर हो,

कभी तो पास आओगी

किस्मत पलटेगी जिस दिन

तुम भी मुस्कुराओगी