कुछ और भी है मेरी ज़िन्दगी का मकसद, हर रास्ते की मंज़िल तू हो ये ज़रूरी तो नहीं। मेरे देश की सरहद मुझे बुला रही है, शादी हर प्रेम कहानी की मजबूरी तो नहीं। एक जंग मेरी है तो एक जंग है तेरी भी, पर मिटटी के हारने की तुझे भी मंज़ूरी तो नहीं। मैं तिरंगे में लिपट कर भी लौटा अगर तो याद रखना, मेरा प्यार काफी है तुझे पूरा करने के लिए, मेरे ना होने से भी तू अधूरी तो नहीं।