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गंगा 

 

गंगा तू मैली या मैं मैली

सोचती हूँ, तुमसे मेरे पाप धुल पाएंगे

या मेरे मैल से तुम पापिन कहलाओगी

मैल की परिभाषा समझ नहीं आती

पाप को परिभाषित तो कर तू

फिर बता कि तू मैली, या मैं मैली

मेरे कितने पाप कितने पुण्य, कोई हिसाब तो बन पाता

कोई प्रेम की भाषा समझाता तो नफरत से मेरा भी पांव बच जाता

 

गंगा तू मैली या मैं मैली,

कुछ फर्क समझ नहीं आता है

दोनों के गर्भ में गहराई है इतना ही दिख पाता है

हम दोनों बहती धाराएं हैं,

दोनों उलझी, मंथन करती, किनारे परखती,

मैं थम जाऊँ या,

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