कुछ शोर मचा कर,तो कुछ खामोशी से रिश्ते तोड़े मैंने,शोर में आवाज बहुत था,खामोशी मुझे तन्हा कर गई ।श्वेता मिश्रा #आजाद पंक्ति
कुछ शोर मचा कर,
तो कुछ खामोशी से रिश्ते तोड़े मैंने,
शोर में आवाज बहुत था,
खामोशी मुझे तन्हा कर गई ।
श्वेता मिश्रा #आजाद पंक्ति