मेरी प्रिय...

मुझे बहुत दिनों से इंतज़ार था तुम्हारा


मुझे कहना है तुमसे-


तुम भूल जाती हो

मेरे घर का रास्ता

या

ये हो सकता है 

मैं ध्यान नहीं रख पाता तुम्हारा

ज़िंदगी की आपाधापी में


आज जब आ गई हो तुम

ये ठान लिया है मैंने

साथ रहेंगे हम दोनों

सदा के लिए

मेरी प्रिय...

(अब नीचे से ऊपर तक पढ़िए)


-Shweta Gupta ✍