कल महसूस किया था

सूरज की गुनगुनानी धूप को

बादलों से

छनकर आते हुए

आज 

सूरज की धूप

बरसात लाई है

स्वेद बनकर


हाँ, मैंने

जान लिया और समझ लिया

उन्मुक्त बचपन में 

और 

कृत्रिम रूप से मुक्त होने का

वास्तविक अंतर

(अब नीचे से ऊपर तक पढ़िए)


-Shweta Gupta ✍