चलती साँसों का मंज़र है,

मुर्दा अरमानों की बस्ती है।

है भूख बहुत ही महंगी यहाँ,

हाँ, प्यास यहाँ पर सस्ती है।


अश्कों से सजा गलियारा है,

ख़ुशियों  पर  नाकेबंदी है।

पैबंद लगी मुस्कान  सजी,

क्योंकि हँसने पर पाबंदी है।


यूँ मन के हारे बिन हार नहीं,

पर जीत के भी आसार नहीं।

अपना मान लिया अंधेरे को,

है सूरज की दरकार नहीं।


कहने को, तन पोशीदा है,

पर नज़र बहुत सवाली  है।

रोती गुड़िया की हैं  चीखें,

अय्यारों की खूब दीवाली है।