
एक नन्हा फ़रिश्ता आया है, अपनी मासूम शरारतों से उसने उत्पात मचाया है ।
ख़ुद तो शरारत करता है , मुझे भी शरारती बनाया है ।
बोलना देर से सीखा मगर, उस छोटी उम्र में ही गेम्स में हाथ जमाया है ।
कुछ देर ना देखे मुझे तो, सारा घर सर पर उठता है ,
अपने सामने पा मुझे, बार बार गले लगाता है ।
जब भी जाती बाहर कहीं , मेरा दुपट्टा माँगने लग जाता है,पूछो गर क्या करना है,
बोले मम्मा ये आपका एहसास कराता है ,
बस उसका ये बोलना ही, मेरे दिल को छू जाता है ।
बहन का है लाडला , फिर भी लड़ने से बाज़ नहीं आता है ,
चोटी खींचे, चुंटी
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