भाई-बहन की यारी सबसे प्यारी होती है,

हर रिश्ते से न्यारी और सब पर भारी होती है!


लड़े ना एक-दूजे से तो बेचैनी होती है,

एक-दूजे की खिंचाईं से ही मस्ती पूरी होती है!


चोटी ना खींचे भाई, बहन की जब तक उसके,हाथों में खुजली होती है,

और भाई को पिटवाकर ही बहन को तसल्ली होती है!


पेट भरा हो फिर भी बहन की थाली से खाकर ही तृप्ती होती होती है,

भाई के राज़ छुपाने की भी रिश्वत होती है,


लाख लड़े एक-दूजे से पर दूसरों के आगे एकता

पूरी होती है, क्योंकि एक-दूजे को पीटने की आपस में मंजूरी होती है !


हर घर में इनके खट्टे-मीठे रिश्ते से ही रौनक होती है! इनसे ही होली और दिवाली मस्ती वाली होती है!

मां-बाप की बगीया इन फूलों से ही महकती है, इनकी यही यादें उनके बुढ़ापे का सूनापन भरती हैं!