माघ महीने के भोर की गुनगुनी सी सर्दी में
मैं रजाई में लेटा तुम्हारे सपने देख रहा था
कि हम किसी लॉन में बैठे अठखेलियां कर रहे है,
तुम मुझे मारती, हँसती और फिर बदतमीज़ कह रही थी
तुम्हारे जोर से हँसने पे पास में बैठा couple कुछ disturb हो गया था
अचानक आंख खुली तो खिड़की के कांच से आवाज़ आ रही थी
देखा तो कबूतरों का एक जोड़ा कांच पे चोंच मार रहा था।
किसीको प्यार करते देखने पे जल जाना केवल इंसानो का काम तो नही।