नवजनित बाल्य को, ज्ञान से है सींचता जो ,
मनुज के चरित्रमयी,अक्श को है खींचता जो ।
फर्श से उठाकर जो अर्श पर बिठा सके,
'गुरू' ही ब्रमांड में, वो सर्वशक्तिमान है ।
ज्ञान से विज्ञान से,निज की पहचान से,
रुबरु कराता जो, गुरु वो महान है ।
अम्ब सा है ज्ञान जिनका,बूँद सा है मान जिनका,
पर्वत सी अडिकता ही गुरु की पहचान है ।
नदियों सी शीतलता ,शशि जैसी चांदनी,
पादप सी छांव जिनकी, गुरु वो भगवान है ।
संकटों से मुक्त करते ,जग को प्रशस्त करते,
ईश्वर ही पूजा गया,गर गुरु का सम्मान है ।।