"जो है वो बनके जी"
तुझ में बात खास है कोई,
तुझ में भी अलग एक खूबी है ।
अंबर रूपी दुनिया में,
एक सितारा तू भी है ।।
लाख हो दामन भरा हुआ,
अंबर का कई सितारों से ।
है तेरा भी किरदार अलग,
औरौं के किरदारों से ।।
सोच तो तू टूटे अम्बर से तो,
अंबर का एक कोना खाली होगा ।
तुझसे रोशन होता है जो,
हिस्सा वो चादर काली होगा ।।
नकार ना अपनी अहमियत,
यूँ खुद को क्यों कम आँके तू ।
हैं छिपे पिटारे हुनर के तुझमें ,
भीतर क्यों ना झाँके तू ।।
तू जो है बस वो बनके जी,
कोई और बनने की चाह न कर ।
जो तुझमें है वो सबमें नहीं,
इसे मान ले और परवाह न कर ।।