यह सर्फ़ पहरे से रास्ते
यही तो मेरी मंजिल है,
तुझे मुझसे मिटा सके
नहीं कोई इतना काबिल है,
मैंने तुझको भुला दिया
एक आरज़ू कि बंदिश है,
तुम आज भी हो उसके करीब
यह तो अपनी अपनी किस्मत है,
बेहूदा सोच हो चली मेरी
तेहज़ीबों कि यह बरकत है,
रियाइसी गरिब हो गए हम
किन्हीं दुआओं की रज़मत है,
अब भी खुशहाल हैं हम
खुदा की बड़ी गनीमत है ।।
THANK YOU FOR YOUR TIME
UNTIL WE MEET NEXT

