कहीं फिर मैं तुझे
अंजान मिलूंगी ।
बिसात पर खेले
फिर वही खेलेंगे ।
इस दफा तू मोहरा
मैं खिलाड़ी रहूॅंगी ।
द्वारे से जीत के
तुम बेआबरू लौटोगे ।
इंतज़ार में उस मौके के
मैं इत्मिनान रखूॅंगी ।
ईमानदारी उस रोज़ भी
पूरी रखेंगे हम ।
इसलिए मैं नमक का
इंतज़ाम रखूॅंगी ।
तेरे इश्क़ को मैं
फिर दौहराऊॅंगी ।
तुझे खुद में कैद
बारम्बार रखूॅंगी ।
मौत बहुत आसानी
से आती है ।
मैं तुझे उस खेल में
गुल़ाम रखूॅंगी ।
THANK YOU FOR YOUR TIME
UNTIL WE MEET NEXT

