# बैठ के सोचा

तो सोचा यह

कि तुझे छोड़

अब क्या सोचूँ ।


# फ़रासत तह औसत

शब्दों से रखो

इंसान यह बाज़ार में

पहचानते नहीं ।


# रख ले दुनिया में

मुझे कोई भी कहीं

लाशों को यहाॅं

इंकार-ए-हक नहीं ।


# आखों का बचपना

अशकों की जवानी

लबों पे हय हंसी

तेरी याद सुहानी ।


# मेरी रिहाई के

परचे भरने वाला

मेरी गुलामी पे

दस्तकत कर गया ।


# उस एक ही दिन में

लोग कितने आए

कितने चले गए

इस बागवान से ।


# अदब कि सरहदें

बढ़ा दी जाए

उनके पीर को कोई

बेहुदा ना कहे ।


# नहीं पसंद अब मुझको

बहस भी कहीं

आदत यह भी मेरी

तुम्हारे साथ ही गई ।


# खाली कटोरे से

दुआऐं बेच रहा

'आशना' वह अमीर फ़कीर

बड़ा अजीब था ।


# हर कि़तआ मेरी

अधूरी रह गई

अधूरी रह गई

उनमें मैं कहीं ।।


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UNTIL WE MEET NEXT