
वो झरने बहार के
वो अदाएं मज़ार के
वो अवाज़ों की खनक
परेशां मेरी नज़र
खुदा वो ग्वार है
कम्पन सवार है
कोई
बेहूदा इत्तेफाक है
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वो झरने बहार के
वो अदाएं मज़ार के
वो अवाज़ों की खनक
परेशां मेरी नज़र
खुदा वो ग्वार है
कम्पन सवार है
कोई
बेहूदा इत्तेफाक है