वो झरने बहार के

वो अदाएं मज़ार के

वो अवाज़ों की खनक

परेशां मेरी नज़र



खुदा वो ग्वार है

कम्पन सवार है



कोई

बेहूदा इत्तेफाक है

आज फिर कोई मज़ाक है



क्या

यह धोका निसार है

तस्लीम सी अज़ार है



क्या हमे प्यार है !

नहीं नहीं

शैतान सर सवार है ।।


THANK YOU FOR YOUR TIME

UNTIL WE MEET NEXT