अक्सर भूल जाने वाले को भी

याद करना एक आदत कोई खास है।

खनक देखती है दुनिया

पर सिक्के नहीं मेरे पास है।

तुम फ़कीर समझते जो मुझको

मेरे पास एक कलंदर बनाने वाला चिराग़ है।

तुम को ही आता है सब

तुम्हारे मर्ज़ की दवा भी मेरे पास है।

मैं सबसे इश्क़ करता हूँ।

भले सब मुझको नफ़रत से नवाज़ते फिरते हैं।

मोहब्बत करने का हुनर ये मेरा खास है।

तुम्हारी ज़िंदगी के तुम हो मालिक लेकिन

तुम्हें कैसे है जीना ये हक़ तुम्हारे पास है!

करो मोहब्बत मीठा बोलो

इस दुनिया को यार तुमसे बहुत आस है!

-शुभेन्दु