1 min read 794.1K reads

वक्त


वक़्त ने बेवक्त ही समझा दिया कि हर चेहरे पे नकाब हैं,आज वाक़िफ है कि, बस कहने को सब खुली किताब हैं।

— Shubhangi
Read more Earn more Learn more