वो मेरे सामने खड़ा है बिल्कुल मेरी तरह,
वो मेरे जैसा है रंग, रूप आकार-प्रकार में,
वो बोलता भी बड़े सलीके और अदब से है,
वो अपने काम में भी बहुत माहिर है..!
उसके अंदर मानवता और नैतिकता भी मुझसे ज्यादा है..,
उसके अंदर दया, धर्म, विचार और सपने भी मुझसे ज्यादा है..
उसकी आँखों में उम्मीद और भरोसा भी मुझसे ज्यादा है...
पर जब मेरी निगाह उस पर पड़ती है तो ना जाने क्यूँ वो झेंप जाता है और मुझसे अलग बन जाता है..
शायद क्योंकि वह मजदूर है..!!
शुभम पाराशर


