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फ़साना


उनसे चार करता, इससे पहले मैं दीवान हो गया।अब इन निगाहो को धुत हुए भी जमाना हो गया।।फिर भी कहते हैं सब, अब भी नाशिली हैं मेरी आँखे।कैसे बयान करू किस कदर महशूर मेरा फ़साना हो गया।।

शुभम कानूनगों (राग)

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