
खो गयी है नज़्म और ग़ज़ल
खो गयी है सपनों की किताब
अब न दिखाते राजा रानी
कहानियां थी जिनसे आबाद
गलियां ही गलियां है शहर में
खो गयी है मंजिले अपनी
जो थी घरों से आबाद
खो गयी है नज्म और ग़ज़ल
खो गयी है सपनो की किताब
लगी थी दोस्तो की
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