हर वो प्रेमी
जो झुक कर
ना दे सका कोई गुलाब
अपनी प्रेयसी को;
वो कुछ कलियाँ चुन लायेगा
बागिचे से
और
समेट कर बांध देगा अपनी प्रेयसी के जूड़े में ,
मोगरे की कतार को;
या आप कहो
ज़िम्मेदारियों की पराकाष्ठा को!!
➖➖➖➖➖➖➖➖➖
श्रुतिका साह


हर वो प्रेमी
जो झुक कर
ना दे सका कोई गुलाब
अपनी प्रेयसी को;
वो कुछ कलियाँ चुन लायेगा
बागिचे से
और
समेट कर बांध देगा अपनी प्रेयसी के जूड़े में ,
मोगरे की कतार को;
या आप कहो
ज़िम्मेदारियों की पराकाष्ठा को!!
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श्रुतिका साह