हर वो प्रेमी

जो झुक कर 

ना दे सका कोई गुलाब 

अपनी प्रेयसी को;

वो कुछ कलियाँ चुन लायेगा 

 बागिचे से

और 

समेट कर बांध देगा अपनी प्रेयसी के जूड़े में ,

मोगरे की कतार को;

या आप कहो

ज़िम्मेदारियों की पराकाष्ठा को!!

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श्रुतिका साह