तुम आए इस कहानी में
जैसे आता है,
अंतिम श्लोक के बाद कोई नया अध्याय!!
तुम आए इस देह में
जैसे आता है,
हृदय की हर हलचल के बाद धमनियों में रक्त!
तुम आए कि जैसे आता है,
हर बरसात के बाद मिट्टी से नमी का फाँक!
तुम आए कि जैसे आता है,
वायु के मृदंग के बाद सरसों की कोपलों पर कौतूहल!!
तुम आए जैसे आता है,
हर सांझ तुलसी के सम्मुख जलते दीपक की बाती पर कोलाहल!!
तुम आए जैसे आता है,
किसी कवि के मन में उसकी कविता का वो अन्तिम पंक्ति का विचार!!
तुम देर से आये
तुम आए तो
पर तुम आए
हर घटना के घटित होने के बाद!!
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श्रुतिका साह
०२.०५.२०२१
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