शून्य सा किरदार तुम्हारा

घटाऊ भी तो क्या

चलो छोड़ो

अब तुमसे

 हटाऊं भी तो क्या

कुछ खुद ही में जोड़ लूं 

और हो जाऊ समान्तर तुम्हारे

फिर होंगे अग्रसरित अनंत की ओर!!!


.......Shrutika