ये आँगन नहीं चाहता
जुड़ जाना
किसी राष्ट्रीय राजमार्ग से;
ये बहता पानी नहीं चाहता
इसके बहाव को काटती हुई
निकल जाए कोई परियोजना
अल्पविराम सी;
ये चाहता है
अपने सीने के रिक्त स्थानों पर कुछ पुस्तकों का भार लिए
एक लम्बी नींद सो जाना
ये गावं की माटी है
जो चाहती है
अपनी देह पर कुछ पुस्तकालयों सा पूर्ण विराम;
श्रुतिका साह


