ये दुनियादारी ना समझा मुझे

मुझे तो बस लाईब्रेरी के किसी कोने में

मुंशी की ईदगाह कहने दे;

काजल में समेटने की जिद ना कर इन आंखों को 

सुन..

तू कुछ देर तो इनमें ऐनक रहने दे!!



श्रुतिका साह