मेरी हर लिखावट का राज

 तू अपने दामन में 

आखिर कैसे छिपाती है!!

कड़ी धूप में मेरी जां

तू अपनी देह से छाव

 आखिर कैसे बनती है!!

इश्क मोहब्बत से परे 

तू जां मेरी मुझे सहमा सा देख

 एक मां होने की रस्म

आखिर कैसे निभाती है!!


...................श्रुतिका