Poetry 1 min read 793.1K reads

भूख


हां मैंने कचरे में पड़ी जूठन के लिए बच्चों को तड़पते देखा है,उस आधी भूखी थाली से रोटी को सरकते देखा है,हां मैंने उस बेबस मां की कोख में भी एक दिल धड़कते देखा है।।

श्रुतिका साह

Read more Earn more Learn more