नौकरी के चलते दूर शहर में कमरा लेकर रहता वो लड़का
ढूंढ लेता होता उस कविता में अपना पूरा गांव,

कभी दोस्ती टूट जाने के डर से इजहार ना कर पाया वो लड़का
ढूंढ लेता होता उस कविता में अपनी प्रेयशी को,

शायद इसलिए भी चोरी होती होंगी कविताएँ,
क्योंकि.....
कोई अकेलेपन से बिलख कर ढूंढ लेता होगा
उस कविता में अपनापन!!

श्रुतिका साह