मेरी दास्ताने-शौक़ बसती सिर्फ खराबों में तशनालबी भी मेरी बुझती फ़क़त सराबों में नफ़स-नफ़स मांगती हूँ मैं दुआओं में उनको जर्रा-जर्रा ढूंढती हूँ फिर जवाबों में हरीफ़ है हर कोई मेरी हर्फ़े-आरजू का छुपाकर रखती हूँ तमन्नाएं हिजाबों में बस दर्दे-निहाँ मयस्सर है इश्क़ में यारों इल्म ली हमने ये मुहब्बत के निसाबों में