जाने कितने दिन मैं चल चुकी हूँ, जाने कितनी रात मैं जल चुकी हूँ, जाने कितने पैरहन बदल चुकी हूँ, और कितनी रफ़ाक़तों में ढल चुकी हूँ...
पर कुछ है जो है, तब से.... अब तक.... बिल्कुल वैसा ही.... माना, ज़मीं वक़्त की बड़ी बहुत है, मगर, मेरे वजूद का एक बेलिबास हिस्सा, है वक़्त की सरहद के उस पार भी...........