
एक ख़्वाब हूँ, हक़ीकत का मारा हूँ मैं समंदर हूँ, कहाँ किसी का किनारा हूँ मैं
मुझे किसी ने थामा भी तो दो पल को अश्क हूँ, दर्दे-दिल का सहारा हूँ मैं
वाइज़ है तू तो मैं आजिज़ हू
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एक ख़्वाब हूँ, हक़ीकत का मारा हूँ मैं समंदर हूँ, कहाँ किसी का किनारा हूँ मैं
मुझे किसी ने थामा भी तो दो पल को अश्क हूँ, दर्दे-दिल का सहारा हूँ मैं
वाइज़ है तू तो मैं आजिज़ हू