एक ख़्वाब हूँ, हक़ीकत का मारा हूँ मैं समंदर हूँ, कहाँ किसी का किनारा हूँ मैं

मुझे किसी ने थामा भी तो दो पल को अश्क हूँ, दर्दे-दिल का सहारा हूँ मैं

वाइज़ है तू तो मैं आजिज़ हूँ तुझसे गर दुआ है तू, टूटता तारा हूँ मैं

गुनहगार होता तो जीत लेता तुझको पर बेक़सूर हूँ, हमेशा ही हारा हूँ मैं

जो तुझे छू जाऊँ तो समझ लेना तेरा हूँ ना छू पाऊँ, तो ग़ज़ल आवारा हूँ मैं