अब बेवक़्त नींद से जगाये कौन
रूठे ख़वाबो को सहलाये कौन
तलबगार नहि रहे वो मेरे
शमा ए महफ़िल जलाये कौन
तजदीद-ए-मोहब्बत मुमकिन नही अब
पर पागल दिल को समझाए कौन
जब निस्बत नहीं दरमियाँ कुछ
तो हँसाये कौन,,रुलाये कौन
उनके मुख़्तलिफ़ रस्ते हैं ए दिल
अब उनकी गली में जाये कौन