जब बुजुर्गों का साया सर से छिन जाता हैं,

तब ये मन कुंठित हो जाता हैं

जब अपना कोई रूठ जाता हैं,

तब ये मन कुंठित हो जाता हैं

जब कोई भीड़ में खुद को अकेला पाता हैं,

तब ये मन कुंठित हो जाता हैं 

जब दिल की बाते कोई किसी से नहीं कर पाता हैं,

तब ये मन कुंठित हो जाता हैं

जब कोई असफलता हाथ पाता हैं,

तब ये मन कुंठित हो जाता हैं

जब कोई दिल के रिश्तों में असहजता पाता हैं,

तब ये मन कुंठित हो जाता हैं


द्वारा - श्रुति शर्मा।