कुछ दूर कभी चलते चलते
जब युँ ही रुक जाए कदम
कुछ दबे -दबे एहसास
जो ना बन पाये शब्द
कुछ मंद -मंद मुस्कान
जो ना बन पायी हँसी
वक़्त मिल जाए यहां
तो कभी यूँ ही हँस लेना
वक़्त के पन्नो से वक़्त ना सही
कुछ शब्द उधार ले लेना
दिल के एहसास को जुबान पर रख लेना
जब वक़्त की किताब होगी खत्म
तब यही वक़्त के पन्नो को
अपने सीने से लगाकर
इन हँसी के साथ दम तोड़ देना
कुछ यूँ ही बस पलट लो
ये वक़्त के पन्ने और बना लो इसे अपने !