ये रंग जिंदगी के हैं.... ~संजय कवि 'श्रीश्री'


कुछ रंग लाचार कर गए,

सिसक सिसक के चुप हुए;

आर्तनाद कर मन में,

सृजन की ओट में छुप गए।


कुछ रंग स्वयं हमने रचे,

जो रंग दिखा गए;

वो रंग उत्सव में सजकर,

जीना सीखा गए।


ये रंग जिंदगी के हैं.......


छुपाना भी होता है,

दिखाना भी होता है;

बदरंग हो जाये, तो रचकर स्वयं,

सजाना भी होता है।


तुम इतना विचार रखना,

सिसकते रंग छुपाना;

सृजन के रंग चढ़ाना,

हर दिन होली मनाना।


~संजय कवि 'श्रीश्री'

 (सर्वाधिकार सुरक्षित)