ये आँखे सुरमई,
मुस्कान गहरी गहरी;
माथे पर बिंदिया,
मन को लुभाती हैं।
लबों की लालिमा,
लटें ये बिखरी बिखरी;
अदायें बेमिसाल,
तुम्हे सुंदर बनाती हैं।
~संजय कवि 'श्रीश्री'


ये आँखे सुरमई,
मुस्कान गहरी गहरी;
माथे पर बिंदिया,
मन को लुभाती हैं।
लबों की लालिमा,
लटें ये बिखरी बिखरी;
अदायें बेमिसाल,
तुम्हे सुंदर बनाती हैं।
~संजय कवि 'श्रीश्री'