उसने कहा

माटी का तन है,

तुच्छ

नश्वर जीवन है।

फिर

जीवन को

अमूल्य बताने लगा;

मैंने पूछा,

तुच्छ है

तो अमूल्य कैसे?

मुझे आत्मा शरीर समझाने लगा।


~संजय कवि 'श्रीश्री'