साहित्य की धरा पे चमन मुक्तिबोध

व्याकुल हुए मन के अमन मुक्तिबोध

शब्द हैं ससीम, आप गगन मुक्तिबोध

सहस्त्र अगणित आपको नमन मुक्तिबोध!

चाँद का मुंह टेढ़ा कहे अब कौन मुक्तिबोध

मील के पत्थर हैं सारे सृजन मुक्तिबोध

यादों में रुंध जाता, अंतर्मन मुक्तिबोध

लौट आओ प्रिय मेरे स्वजन मुक्तिबोध!

~संजय कवि 'श्रीश्री'