कितने सभ्य हो गए हो तुम -संजय कवि 'श्रीश्री'


नम्र अभिमान गढ़कर,

नग्न सम्मान गढ़कर,

स्याह द्युतिमान गढ़कर,

कितने सभ्य हो गए हो तुम,

नए प्रतिमान गढ़कर।

-संजय कवि 'श्रीश्री'

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