दिखते हैं बस, मिले हुए ~संजय कवि "श्रीश्री"


मायामय सदृश समीप

सूरज की लाली लिए,

हम क्षितिज हैं जैसे,

दिखते हैं बस, मिले हुए।

~संजय कवि "श्रीश्री"