एक नन्ही परी आई जब इस संसार में

आँखों में थे उसके हज़ारो सपने

चल पड़ी कुछ अंजनी राहो पे वो

जैसे पा लेगी अपनी हर मंज़िल को

 

इस संसार की बुराइयों से कोसो दूर 

आँखों में सपने लिए भरपूर

बढाती गयी अपने कदमो की रफ़्तार को

चल दी पाने अपनी मंज़िल को

 

पर बढ़ते ही आगे उसके 

जकड़ी गई वो संसार की बुराइयों से

डाल दी संसार ने उसके कदमो में बेड़ियाँ

संसार के नियमो ने उसके कदमो को था जकड़ लिया

 

एक पल में जैसे टूटे सारे सपने उसके

आँखों में सपनो की जगह आंसू थे भरे

तोड़ देना चाहती थी इन बेड़ियों को वो 

ऊंचे आसमान में उड़ना चाहती थी पंख पसार के वो 

 

पर काट दिया इस संसार ने उसके पंखो को

जाने कैसे उड़ान भरेगी अपने सपनो की वो

एक पल में जैसे टूटे सारे सपने उसके 

जकड़ी गई वो संसार की बुराइयों से

 

पर एक दिन तोड़ेगी वो इन बंधिशो को 

फिर से भरेगी उड़ान अपने सपनो की वो

हारना ना सीखा था उसने कभी 

हारेगी ना वो इस संसार से कभी

 

जीत जाएगी इस संसार की बुराइयों से वो

भरेगी उड़ान अपने हौसलों की वो 

फिर उड़ेगी इस खुले आसमान में वो

जैसे कोई आज़ाद पंछी हो वो.....