अजब है ये इंसान का मिजाज़ भी  आया तो था,  इस दुनिया में अकेला ही!! पर हर पल साथ किसी का चाहता है कैसे करे अपना अकेलापन दूर, उसकी ही राह खोजता रहता है!! क्या करेगा साथ पा के तू किसी का  वो तो आज है, कल ना जाने कहा चला जायेगा!! खुद को देख, कहाँ खड़ा है तू  दोबारा फिर यूँ ही, अकेला रह जायेगा तू!! आया तो न था, तू साथ किसी के यहाँ  फिर क्यों, साथ खोजता है हर पल यहाँ वहां!! यह जो जीवन का गहरा समुन्दर है उस समुन्दर को, पार तुझे स्वयं करना है!! ना कोई साथ तेरे आया था ना साथ कोई जायेगा इस जीवन के पथ पर, खुद को तू सदा अकेला ही पायेगा ||