हक़दार!!
लिबास मेरा मैला सही,
बेदाग मन मेरे बच्चों का है!
आप जितना चाहे दुत्कार दो दरवाजे से,
खुले आसमां का प्यार मेरे बच्चों का है !
आँगन में कूड़ा साफ़ कर सकता हूँ रोज़ ,
मेहनत की रोटी पर हक़ मेरे बच्चों का है !
आप खोजते रहते हो कहाँ कहाँ,
खुद्दार व्यक्तित्व मेरे बच्चों का है !
आप किताबों से भी भविष्य बना नहीं पाते,
कागजो में छिपा नसीब मेरे बच्चों का है!
घर की दीवारे चाहे जितनी ऊँची बनालो,
उनसे ऊँचा होंसला मेरे बच्चों का है !
गरीबी में जिंदगी जीना आसान नहीं,
बचपन जीने का ख्वाब मेरे बच्चों का है!
जिस के दरवाजे पर मुझे अनदेखा कर दिया आपने,
उसकी रहमत पर पहला हक़ मेरे बच्चों का है !
-श्रद्धा अरविन्द विश्व

