Poetry 1 min read 785.3K reads

वो


वो थपकियां सहम सी गयी हैवो उगंलिया ठिठुर सी गयी है

वो आंखे भी बुढि हो चुकि हैलोरियां भी अब लड़खडा़ने सी लगी है

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