जीवन का हर युद्ध हारकर 

जीवन से संतुष्ट रहा हूं

श्वेत यवल वर्णों को तजकर 

श्याम वर्ण में तुष्ट रहा हूं।

रात अमावस में जग एेसा डूबा 

जैसे हो मेरी ही परछाईं का छींटा 

दुख में ही है उल्लास समाहित, जानकर यह

दुख में ही मैं व्यस्त रहा हूं 

जीवन का हर युद्ध हारकर……..