कभी शब्दों से तुम तक 

कभी तुम से शब्दों तक

यह जो अनवरत यात्रा है,

प्रेम है मेरा 

कभी नीले बादल सा बरसकर

कभी गहरे समंदर में उमड़कर 

ये जो पानी की अंगड़ाई है

जीवन है मेरा 

सुनो विशाखा 

कभी प्रेम सा निश्छल है जो

कभी जीवन सा मुश्किल है जो

ये जो क्षणभंगुर सी मादकता है जिसमें

विशाखापत्तनम है मेरा