तुम्हारी पलकों के ख़्वाब 

अपनी आँखों से देखे हैं 

इस मोहब्बत में हमने

कई मक़ाम देखे हैं।


वो जो रौशन थी इक लौ

तुम्हारे जाने के बाद 

बस उसके उजाले में

काट दी ज़िंदगी हमने

वो सितम सब तुम्हारे

कहीं बेहिसाब रखे हैं

इस मोहब्बत में हमने

कई मक़ाम देखे हैं।